कनाडा भेजने के नाम पर 14.40 लाख की ठगी का आरोप, हाई कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
Accused of defrauding ₹14.40 lakh under the pretext
चंडीगढ़। Accused of defrauding ₹14.40 lakh under the pretext, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कनाडा भेजने का झांसा देकर 14.40 लाख रुपये की कथित ठगी के आरोपित साहिल शर्मा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, आरोपी के आचरण और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उसकी हिरासत में पूछताछ (कस्टोडियल इंटेरोगेशन) अत्यंत आवश्यक है। जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत जैसी असाधारण राहत देने का कोई आधार नहीं बनता और याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता ने करनाल में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मूल रूप से पैसों का विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दे दिया गया है। उसने दावा किया कि वह शिकायतकर्ता की रकम लौटाना चाहता था, लेकिन कुछ देरी के कारण ऐसा नहीं हो सका।
दलील का विरोध करते हुए क्या कहा गया?
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से इस दलील का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपित पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कानून की प्रक्रिया से बच रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उसने न तो आत्मसमर्पण किया और न ही जांच में शामिल हुआ।
शिकायतकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि आरोपित आदतन धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति है। आरोप है कि उसने तीसरे व्यक्ति के नाम का चेक फर्जी हस्ताक्षरों के साथ शिकायतकर्ता के भाई को देकर मामले को टालने का प्रयास किया।
इसके अलावा उसके खिलाफ वर्ष 2026 में एक अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज हो चुका है, जिसमें वह जमानत पर है।रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी ने शिकायतकर्ता गुरप्रीत सिंह से कनाडा भेजने के नाम पर 14.40 लाख रुपये लिए थे।
वीजा रद्द होने के बाद केवल छह लाख रुपये ही लौटाए गए
वीजा रद्द होने के बाद केवल छह लाख रुपये ही लौटाए गए। अदालत ने यह भी नोट किया कि चार लाख रुपये का जो चेक दिया गया, वह किसी अन्य व्यक्ति के खाते का था, जिससे मामले को लटकाने की कोशिश की गई। अदालत ने विदेश भेजने और रोजगार के नाम पर लोगों से ठगी के बढ़ते मामलों पर भी चिंता व्यक्त की।
कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की धोखाधड़ी से विदेश में रोजगार और शिक्षा के अवसर तलाशने वाले लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।एक फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि हिरासत में पूछताछ, अग्रिम जमानत प्राप्त व्यक्ति से पूछताछ की तुलना में अधिक प्रभावी होती है।
अदालत ने कहा कि हिरासत में प्रभावी पूछताछ से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं, जो अन्यथा छिपे रह सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने माना कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए आरोपी की कस्टोडियल इंटेरोगेशन आवश्यक है और अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी।